बुधवार, 5 सितंबर 2012

दर्देदिल की आवाज


देखा है जिंदगीमे`,हमने ये आजमाके !
देते हैं यार धोखा ,दिलके करीब आके |
किस दुश्मनी का मुझसे , बदला लिया है यारा !


खुश है जहां वाले , मेरा आशिया जलाके |

१:- शाम सूरज को ढलना सिखाती है,शमा परवाने को जलना सिखाती है
आगे बढने में आती है तकलीफे कई, लेकिन ये तकलीफे ही तो इंसान को
आगे बढ़ना सिखाती है
२:- दर्द में कोई मौसम प्यारा नही होता, दिल हो प्यासा तो पानीसे गुजra नही होता
कोईतो देखे हमारी बेबसी, हम सबके होजाते पर कोई हमारा नही होता
३:-सितारों में अकेला चाँद जगमगाता है, अकेला इंसान डगमगाता है
काँटों से मत घबराना ऐ दोस्त, क्योकि कटो` मे ही अकेला गुलाब मुस्कुराता है
४:-आज खुदाने फिर पूछा,तेरा चेहरा उदास क्यों है,तेरी आखों में प्यास क्यों है
जिसके पास तेरे लिये वक्त नही है, वही तेरे लिए खास क्यों है
५:-फूल को कभी खुश्बू का एहसास नही होता, हरकिसी-पर दिल को विब्श्वास नही होता
जरूर खुदा मेहरबान है मुझपर,बरना आप जैसा प्यारा दोस्त मेरे पास नही होता
६:-प्यार आपस में बढाओ तो कोई बात बने, समाज को एक बनाओ तो कोई बात बने
एक धक्के से नही होनेको है ..............,जोर पुरजोर लगावो तो कोई बात बने
७;-संघर्षो के शाये में असली आजादी पलती है, इतिहास उधर मूढ़जाता है जिस ओर जवानी चलती है     

गुरुवार, 29 मार्च 2012

बेतिया राजमैनेज साहब मन्दिरों के शोषण में अब हम आपका बिरोध करेंगे : इसकी सजा भुगतने को तैयार हूँ

बेतिया राज के कोर्ट ऑफवाड्स  के अब  तक  के  मंदिर अधिक्षको में से  आमिर  बनने का  सॉट- कवट हाथ  लगा  चुके  1966 इस्वी से अपने  पद  पर  मरणोपरांत  तक  बने  रहने  का  दावा  करने  वाले  वर्तमान  मंदिर  अधीक्षक द्वारा  बेतिया राज के तमाम मन्दिरों का अब तक के  किए  गए आर्थिक नाकेबंदी को नाकाम करे कही उन्हें  शसक प्रसासक व धर्म रक्ष्को और हमसबका इस गम्भीर  बिषय पर मौन समर्थन  प्राप्त तो नहीं  है ??इस बात की पुष्टि मन्दिरों के रख-रखाव पर एक फूटी कौड़ी भी खर्च नही करने वाले राजस्व परिषद से मन्दिरों के शोषण के लिए जारी नित्य नये तुगलकी फरमानों से हो जाता है .........,इनसब से उबकर कुछ और करने को दिल बेचैन सा हो जाता है,आज दिनांक 9/7/2013 को शाम के 4 बजे राज मैनेजर अपने कार्यालय में एक बैठक बुलये थे, मै भी गया था, बैठक के अंत में सबको एक-एक रसीद बही दिया जाने लगा,सब लोग सहर्स लेकर उससे प्राप्त राजस्व राज के खजाने में जमा करने का संकल्प ले रहे थे ,
........ मै नही लिया , उनलोगों ने मुझसे कारण पूछा , मै - श्री मान जब  मन्दिरों के रख-रखाव सुविधा में विकास का सब्जबाग दिखाकर 1964 ईस्वी में मन्दिर के तमाम अतिथिशालाओं का लीज  कौड़ीयो के भाव  में किया गया 'तमाम भूखंडों का लीज भी किया गया बगीचों के पेड़ो से फलो और तालाब का डाक तो हर वर्ष हो रहा है ,1995 ईस्वी से लगातार यज्ञ व अष्टयाम से शुल्क बढोत्तरी के क्रममें लगातार वसूली हो रही है  ........ ....... ऐसे में माली, टहलू, सिपाही,ववार्ची,पेंट-पोचरा समेत तमाम मन्दिर रख-रखाव व सफाई तथा सुरक्षा  समबंधित तमाम बुनियादी व्यवस्थाये निरस्त कर ,पुजारियों को दीजारही नगण्य राशी को ही मन्दिर रख- रखाव की राशी बतलाया जा रहा है... ऐसे में मै जो रशीद से वसूल कर दूंगा उसे आप मन्दिर में ही खर्च करेंगे,पुजारियों व भक्तो द्वारा हो रहे मन्दिर संचालन से आप बेहतर संचालन करेंगे लिखित  आश्वसन दे ......
अन्यथा जो भक्त पेंट-पोचरा,टूट-फुट मरम्मत में सहयोग करता है उस भक्त के गाड़ी पूजन, कथा व विवाह से दक्षिणा के आलवे क्रमस:151रुपया, 51 रुपया, 1100 रुपया का रशीद काटने में मै अपने को असमर्थ पारहा हु,........,श्रीमान मन्दिरों का शोषण अतिक्रमण का पोषण तथा बेतिया राज के मन्दिरों को नष्ट करने की साजिस अब मै सहने में अक्षम महसूस कर रहा हूँ,........,हाँ अगर सर्वोच्च न्यालय के आदेशो का अनुपालन करके कमसे कम मन्दिरों के भूखंडों को 1856 ईस्वी के स्थिती में बहाल करदेते है तब आज के वर्तमान दर से किसी भी मन्दिर को उन भूखंडों का कर आपके राज खजाने में जमा करने में कोई आपत्ति नही होगी ,........ यु तो तमाम लौकिक विद्याओं का विकास लाठी और अग्नेआस्त्रो के ही बल परहीं  होता है , लेकिन मै कोर्ट ऑफ वाड्स के अधिनस्त बेतिया-राज के तमाम मन्दिरों के शोषण के खिलाफ रख-रखाव निति बनाने के लिए सरकारों को अपने लेखन कला के जरिये विवश करने का पक्षधर हूँ   

कई पीढियों से मंदिलो का देख भाल करने  के बाद भी मन्दिरों का बेलगाम शोषण व अतिक्रमण करने वाली शक्तिया हावी होते जा रही है बचावो ....... इसे शेयर करो तथा मेरा मनोबल बदावो
`` आपका आशीर्वाद ही मेरा भविष्य है ``                                                                                                                                                                                    

बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

बेतिया राज के मन्दिर अधीक्षक को सलाह

यु तो बेतिया राज के मन्दिर अधीक्षक कोमात्र  १८०० रुपया वार्षिक बेतन मिलता है,लेकिन राज में खाकपति के रूप में आगमन  से आज  शौट-कट के जरिये अरबपती हो चुके है, अब अपने अधिनस्त के सभी मन्दिरों का आर्थिक नाकेबंदी कर रहे है,मन्दिरों का पेंट-पोचरा,बार्षिक उत्सव शुल्क ,माली, टहलू,सिपाही, बाबर्ची, दैनिक भोग समाग्री, सपाईसंसाधनो के आलावे रात्रि प्रहरी,पूजन व आभूषन तक को डकार चुके है,अब मन्दिरों से बेरोक -टोक  आयोजन  शुल्को के आलावे,भूखंड, तालाब, बाग,भवनों के लीज  का पैसा भी राज में जमा करने के नाम  पर ले रहे है ,और भगतो को मन्दिर में सहयोग  करने से रोकते भी है , तथा मन्दिरों के बिकाश पर चर्चा करने के नाम से वे भड़क जाते है,तथा यह कहते है की मेरा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता ,मै अपने मरनो प्रान्त तक  इस पद पर बना रहूँगा ,
अत: उनके लिए मेरा यह संदेस :- 
होके बेदर्द यू लासो के कफन मत बेचो, फूल खिलनेदो आमन के चमन मत बेचो , तुमको बेतिया राज से हुए  आमदनी  की कसम देता हु, सवार्थ के हाथो अपना वतन मत बेचो

शनिवार, 3 दिसंबर 2011

राजेन्दर बाबु के जन्मदिन पर बिचारनिय बिन्दु

1-अन्तरजातिय विवाह के लिए सरकारी प्रसरय क्यो?
2-प्राकृती द्वारा सब मनुस्य बराबर है तो आरक्षण द्वारा अगड़ी जाती के बिकाश मे बाधा क्यो ?
3-सरकार द्वारा आचरण बिगाड़ना व भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना धर्म संगत नही है

शुक्रवार, 6 मई 2011

माँ दुर्गाके जमिनपर महिषाशुरका कब्जा,देव भक्तो बचाओ

भारतबर्ष के नागर शैली की अनुपम कृतियो मे एक बिश्व का एकलौता सर्वेश्वरी दुर्गा पिठ बिहार का बेतिया स्थित दुर्गाबाग मंदिर के तमाम 12 एकड़ भुखण्डो पर भी अतिक्रमणकारियों का जन सैलाब टुट पड़ा है,लेकिन जिला प्रशासन, बेतिया राज तथा तमाम जन सहयोगी निगाहे व भक्तगण मुक दर्शक बने अपना मनोरंजन कर इन अतिक्रमणकारियो का मनोबल बढ़ा रहे है .जबकी अतिक्रमण मुक्ती की पहल चारदिवारी निर्माण बिना अधुरी है,. . . इसे पुरा करने के लिये तमाम हिन्दु  नागरिक(ब्यवशाइ, भक्तगण तथा पुजारी) अपने तन,मन और धन के साथ इस ऐतिहासीक कार्य को पुरा करा सकने मे सक्छम देवदुत की प्रतिक्षा मे रत् है ताकी यहा सर्वाधिक भक्तो को सफाइ सुरक्छा व धर्मशाला आदि मुल सुविधा भी मिल सके,…  "जिला प्रशासन द्वारा इसे ध्वनी-बिस्तारक-प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित" करने का एक सुचना पट्टतो लगाया गया है, लेकिन प्रशासन का ही एक बिभाग जिला अनुमण्डल उसकी अनदेखी कर लाउड स्पीकर तथा साउण्ड बक्स बजाने की अनुमती बेरोक टोक <पुजारी के अनुशंसा बिना ही>प्रदान कर रहा है
यहाँ एकसाथ 6 अष्टयाम तक एकसाथ होते रहते है
ऐसे मे पुजापठियो के आलावे अगल बगल के तमाम शिक्षण संस्थाओ,छात्रवासो, आवासो मे रह रहे लोगो के आलावे सबको अनेको कठिनाइयाँ हो रही है
"प्रशासन ध्वनी प्रतिबंधित क्षेत्र घोशणा का अपना बोर्ड हटाले या
उसे नियंत्रित करने का पहल स्वयं करे
"जब प्रशासन ही मौन,तो सुनेगा कौन,"

मंगलवार, 3 मई 2011

आज महिषासुर के कब्जेमे है"माँ दुर्गा की भुमी"

दुर्गासप्तशती के ऋगबेदोक्त देवीसुक्त मे बर्णित,भारतबर्ष के नागरशैली की अनुपम कृतियोँ मे एक,बिहार राज्य के पच्छिम चम्पारण के मुख्यालय बेतिया नगर स्थित "दुर्गा बाग" मंदिर के तमाम 12 एकड़ भुखण्डो को आज महिषाशुर अपने मनमाने ढंग से बेच रहाहै,यहाँ के तमाम शक्तिशाली लोग मुकदर्शक बनकर उनका मनोबल बढ़ा रहे है, लेकिन प्रतिकारक देवदुत की प्रतिक्षा हम सबको है, "शमाबुझकर भी जल सकती है,नौका तुफान से निकल सकती है,इसदेश के तमाम धर्मरक्षको निराश नाहो,हालत कभी भी बदल सकती है"

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

ॐकैसे बचेँगे मन्दिर??

प्राचिन मंदिर सिर्फ हम हिन्दुओँ के आस्ता का प्रतिक चिन्ह ही नही बल्की अपने मे अनेको कहानियाँ व सँस्कृती समेटे हमारे बिश्व की ऐतिहासिक धरोहर भी है,
तमाम मंदिरो का संचालन हमारे बार्षिक अंशदान तथा निर्माताओ द्वारा निर्धारित चल- अचल ब्यवस्थाओँ से तथा पुजारियो की जिविका लोगो के मन्नत पुर्ण होने पर किए गये चढ़ावन से चलता है,
... . . ... राजतंत्र के समाप्ती के बादसे हीँ बेतिया -राज के तमाम धरोहरो के साथ कुछ अतिप्राचिन मंदिर भी कोर्टऑफवाड्स के अधिनस्त होगये, उनके सन्ञ्चालनार्थ तमाम ब्यवस्थाए यथावत रखने के लिए गृहमँत्रालय भारत सरकार द्वारा तमाम अचल सम्प्त्तीयो के आलावे राज कोषसे ही टेम्पुल -डेबलपमेन्ट -फण्ड जमाकराया गया,.................राजस्व परिसद के मेम्बर द्वारा राज प्रबंधक का पद श्रृजित किया गया,इनके द्वारा भी तमाम मंदिरोके उक्त फण्ड को, फिर तमाम चल- अचल सम्पत्तियो को, फिर यज्ञ अनुष्ठान से प्राप्त रकम को तो वे डकार हीँ चुके है,अब मंदिरो को भी डकाने पर तुले हुये है,बेतिया राज के आधिनस्त के तमाम मंदिरो के संरक्षणार्थ मै आप तमाम पत्रकारो,अधिबक्ताओ, बुद्धिजिवियो,अधिकारियो,धर्मरक्षको,धर्मगुरुओँ,शासको,प्रशासकोँ, नेताओ,तथा देव तुल्य सजग नारिको के रुपमे अपका बिहार राज्य के बेतिया नगर मे आवाहन करता हुँ